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Monday, 17 July 2017

School essay

मेरा स्कूल पर निबंध  (300 शब्द)

मेरा स्कूल मेरे घर से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर है। ये बहुत ही स्वच्छ और शांतिपूर्ण दिखाई देता है। मेरा स्कूल एक मंदिर के समान है जहाँ हम रोज भगवान से प्रार्थना करने और एक दिन में छ: घंटे पढ़ने के लिये जाते है। हमारे स्कूल शिक्षक बहुत अच्छे है और हमें बेहद विनम्रता से पढ़ाते है। मेरे स्कूल में पढ़ाई, यूनिफार्म और स्वच्छता को लेकर बहुत कड़े नियम है। मैं रोज स्कूल जाना पसंद करता हूँ क्योंकि मेरी माँ मुझसे कहती है कि रोज स्कूल जाना और सभी अनुशासनों का पालन करना बहुत जरुरी है। स्कूल ज्ञान का मंदिर है जहाँ हम बहुत रोचक तरीके से सीखने की प्रकिया में शामिल होते है। हम पढ़ाई के साथ और भी बातें सीखते है जैसे अनुशासन, आचरण, समय-पालन और शिष्टाचार आदि।
मेरे स्कूल का वातावरण बहुत अच्छा है जहाँ पर ढ़ेर सारी सीनरी और हरियाली उपलब्ध है। यहाँ एक बड़े उद्यान है जिसमें रंगबिरंगे फूल, सजावटी पेड़, हरी घास के साथ एक तालाब भी है जिसमें मछलियाँ, मेंढ़क आदि है। दूसरी चीजें जैसे बड़ा खेल का मैदान, बड़ा खुला स्थान मेरे स्कूल को एक प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करता है। मेरे स्कूल में क्रिकेट नेट, बास्केट बॉल कोर्ट और स्केटिंग मैदान की भी सुविधा उपलब्ध है। मेरा स्कूल सीबीएसई बोर्ड के नियमों का अनुसरण करता है। मेरा स्कूल नर्सरी से कक्षा 12 तक की सुविधा उपलब्ध कराता है। मेरे स्कूल के प्रधानचार्य स्कूल में अनुशासन और स्वच्छता को लेकर काफी गंभीर है।
जो बच्चे स्कूल से बहुत दूर रहते है उनके लिये मेरा स्कूल बस की सुविधा उपलब्ध कराता है। सुबह के समय सभी बच्चे खेल के मैदान में प्रार्थना के लिये जुटते है और प्रार्थना के बाद अपने-अपने कक्षा की ओर प्रस्थान करते है। मेरे स्कूल में लगभग नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के 2000 बच्चों का दाखिला हर साल होता है। मेरे स्कूल में अलग-अलग विषयों जैसे गणित, कला, विज्ञन, भूगोल, इतिहास, अंग्रेजी आदि के लिये अलग-अलग शिक्षक है। मेरे स्कूल परिसर में एक बड़ी पुस्तकालय,लेखन सामग्री दुकान और कैंटीन है। मेरा स्कूल एक वार्षिक कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें भाग लेना सभी के लिये अनिवार्य है।

School essay

मेरा स्कूल पर निबंध  (400 शब्द)

तीन मंजिला प्रभावपूर्ण ढ़ंग से बना मेरा स्कूल बहुत शानदार है और जो शहर के बीचों-बीच स्थित है। ये मेरे घर से लगभग 3 किमी की दूरी पर है और मैं अपने स्कूल बस से जाता हूँ। मेरा स्कूल राज्य का सबसे अच्छा स्कूल है जहाँ मैं पढ़ता हूँ। ये बेहद शांतिपूर्ण और प्रदूषण से दूर स्थित है। स्कूल के दोनों तरफ सीढियाँ है जो हर मंजिल की तरफ ले जाता है। इसके पहले तल पर सुसज्जित और बड़ी पुस्तकालय; अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला और एक कंप्यूटर प्रयोगशाला है। इसके भू-तल पर स्कूल रंग-भवन है जहाँ सभी वार्षिक कार्यक्रम, मीटिंग, पीटीएम, नृत्य प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती है।
प्रधानाचार्य कार्यालय, मुख्य कार्यालय, क्लर्क कमरा, स्टॉफ कमरा और सामूहिक पढ़ाई कक्ष भूतल पर स्थित है। स्कूल की कैंटीन, लेखन सामग्री की दुकान, चेस रुम और स्केटिंग हॉल भी भूतल पर ही स्थित है। मेरे स्कूल में प्रधानाचार्य के कार्यालय के सामने दो बॉस्केटबॉल कोर्ट है जबकि फुटबॉल मैदान इसके किनारे में है। मेरे स्कूल में मुख्य कार्यालय के सामने रंग-बिरंगे फूलों और सजावटी पेड़ों से भरा एक छोटा सा उद्यान है, जो पूरे स्कूल परिसर की सुंदरता को बढ़ा देता है। मेरे स्कूल में लगभग 2000 विद्यार्थीयों ने दाखिला लिया है । वो हमेशा अंतर- स्कूली प्रतियोगितों में अव्वल आते है।
मेरे स्कूल में पढ़ाई का तरीका बेहद रचनात्मक और प्रगतिशील है जो किसी भी कठिन विषयवस्तु को आसानी से समझने में मदद करता है। हमारे शिक्षक बहुत ईमानदारी से पढ़ाते है और सबकुछ व्यवहारिक तरीके से समझाते है। मेरा स्कूल हर कार्यक्रम में प्रथम आता है जैसे अंतर-स्कूली सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल क्रियाएँ आदि। मेरा स्कूल बहुत शानदार तरीके से साल के सभी महत्वपूर्ण दिनों को मनाता है जैसे खेल दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, शिक्षक दिवस, बाल दिवस, अभिभावक दिवस, क्रिसमस डे, वार्षिक कार्यक्रम, नया साल, गाँधी जयंती आदि।
हमलोग पढ़ाई से अलग दूसरी क्रियाओं में भी भाग लेते है जैसे तैराकी, एनसीसी, स्कूल बैंड, स्कॉउटिंग, स्केटिंग, नृत्य, गाना आदि। स्कूल के नियम अनुसार गैर अनुशासित और दुर्व्यवहार करने वाले विद्यार्थीयों को उनके क्लास टीचर द्वारा दण्ड भी दिया जाता है। हमारे स्कूल प्रधानचार्य सभी कक्षा के बच्चों के चरित्र निर्माण, शिष्टाचार, नैतिक शिक्षा, अच्छे मूल्यों को रखना, दूसरों का सम्मान करना आदि के लिये रोज 10 मिनट की क्लास मीटिंग हॉल में लेते है। हमारा स्कूल का समय बेहद मजेदार और सुखद होता है क्योंकि हम लोग रोज बहुत सारा रचनात्मक और व्यवहारिक कार्य करते है। कहानी कहने का हमारा मौखिक आकलन, गीत, कविता पाठ, हिन्दी और अंग्रेजी में बातचीत आदि क्लास टीचर द्वारा रोज लिया जाता है। इसलिये मेरा स्कूल दुनिया का सबसे बेहतरीन स्कूल है।

Diwali essay

दिवाली निबंध 6 (600 शब्द)

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज्यादा त्योहार मनाये जाते है, यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने उत्सव और पर्व को अपने परंपरा और संस्कृति के अनुसार मनाते है। दिवाली हिन्दू धर्म के लिये सबसे महत्वपूर्णं, पारंपरिक, और सांस्कृतिक त्योहार है जिसको सभी अपने परिवार, मित्र और पड़ोसियों के साथ पूरे उत्साह से मनाते है। दिपावली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है।
ये बेहद खुशी का पर्व है जो हर साल अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है। हर साल आने वाली दिवाली के पीछे भी कई कहानीयाँ है जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को जरुर बताना चाहिये। दिवाली मनाने का एक बड़ा कारण भगवान राम का अपने राज्य अयोध्या लौटना भी है, जब उन्होंने लंका के असुर राजा रावण को हराया था। इसके इतिहास को हर साल बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रुप में याद किया जाता है। अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल का वनवास काट कर लौटे अयोध्या के महान राजा राम का अयोध्या वासीयों ने जोरदार स्वागत किया था। अयोध्या वासीयों ने अपने राजा के प्रति अपार स्नेह और लगाव को दिल से किये स्वागत के द्वारा प्रकट किया। उन्होंने अपने घर और पूरे राज्य को रोशनी से जगमगा दिया साथ ही राजा राम के स्वागत के लिये आतिशबाजी भी बजाए।
अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिये लोगों ने लजीज पकवान बनाये, हर कोई एक दूसरे को बधाई दे रहा था, बच्चे भी खूब खुश थे और इधर-उधर घूमकर अपनी प्रसन्नता जाहिर कर रहे थे। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सूरज डूबने के बाद लोग इसी दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते है। जहाँ एक ओर लोग ईश्वर की पूजा कर सुख, समृद्धि और अच्छे भविष्य की कामना करते है वहीं दूसरी ओर पाँच दिनों के इस पर्व पर सभी अपने घर में स्वादिष्ट भोजन और मिठाईयां भी बनाते है। इस दिन लोग पाशा, पत्ता आदि कई प्रकार के खेल भी खेलना पसंद करते है। इसको मनाने वाले अचछे क्रियाकलापों में भाग लेते है और बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये गलत आदतों का त्याग करते हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन में ढ़ेर सारी खुशियाँ, समृद्धि, संपत्ति और प्रगति आयेगी। इस अवसर पर सभी अपने मित्र, परिवार और रिश्तेदारों को बधाई संदेश और उपहार देते है।
रोशनी का उत्सव ‘दीपावली’ असल में दो शब्दों से मिलकर बना है- दीप+आवली। जिसका वास्तविक अर्थ है , दीपों की पंक्ति। वैसे तो दीपावली मनाने के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएं कही जाती है लेकिन जो मुख्य रुप से प्रचलित मान्यता है वो है असुर राजा रावण पर विजय और भगवान राम का चौदह साल का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या लौटना। इस दिन को हम बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये भी जानते है। चार दिनों के इस पर्व का हर दिन किसी खास परंपरा और मान्यता से जुड़ा हुआ है जिसमें पहला दिन धनतेरस का होता है इसमें हमलोग सोने-चाँदी के आभूषण या बर्तन खरीदते है, दूसरे दिन छोटी दिपावली होती है जिसमें हमलोग शरीर के सारे रोग और बुराई मिटाने के लिये सरसों का उपटन लगाते है, तीसरे दिन मुख्य दिपावली होती है इस दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है जिससे घर में सुख और संपत्ति का प्रवेश हो, चौथे दिन हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए साल का शुभारम्भ होता है और अंत में पाँचवां दिन भाई-बहन का होता है अर्थात् इस दिन को भैया दूज कहते है।

Diwali essay

दिवाली निबंध 5 (400 शब्द)

दिवाली को रोशनी का त्योहार के रुप में जाना जाता है जो भरोसा और उन्नति लेकर आता है। हिन्दू, सिक्ख और जैन धर्म के लोगों के लिये इसके कई सारे प्रभाव और महत्ता है। ये पाँच दिनों का उत्सव है जो हर साल दशहरा के 21 दिनों बाद आता है। इसके पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अपने राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्यावासीयों ने भगवान राम के आने पर आतिशबाजी और रोशनी से उनका स्वागत किया।
दिपावली के दौरान लोग अपने घर और कार्यस्थली की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करते है। आमजन की ऐसी मान्यता है कि हर तरफ रोशनी और खुले खिड़की दरवाजों से देवी लक्ष्मी उनके लिये ढ़ेर सारा आशीर्वाद, सुख, संपत्ति और यश लेकर आएंगी। इस त्योहार में लोग अपने घरों को सजाने के साथ रंगोली से अपने प्रियजनों का स्वागत करते है। नये कपड़ों, खुशबुदार पकवानों, मिठाईयों और पटाखों से पाँच दिन का ये उत्सव और चमकदार हो जाता है।
दिपावली के पहले दिन को धनतेरस या धनत्रेयोंदशीं कहते है जिसे माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। इसमें लोग देवी को खुश करने के लिये भक्ति गीत, आरती और मंत्र उच्चारण करते है। दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या छोटी दिपावली कहते है जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ऐसी धार्मिक धारणा है कि सुबह जल्दी तेल से स्नान कर देवी काली की पूजा करते है और उन्हें कुमकुम लगाते है।
तीसरा दिन मुख्य दिपावली का होता है जिसमें माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है।
चौथा दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की अराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर पूजा करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्र से बचाया था। पाँचवें दिन को हमलोग यामा द्वीतिय या भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है।

Diwali essay




दिपावली पर निबंध (दिपावली एस्से)

दिवाली निबंध 1 (200 शब्द)

भारत एक ऐसा देश है जिसको त्योहारों की भूमि कहा जाता है। इन्हीं पर्वों मे से एक खास पर्व है दीपावली जो दशहरा के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है। इसे भगवान राम के 14 साल का वनवास काटकर अपने राज्य में लौटेने की खुशी में मनाया जाता है। अपनी खुशी जाहिर करने के लिये अयोध्यावासी इस दिन राज्य को रोशनी से नहला देते है साथ ही पटाखों की गूंज में सारा राज्य झूम उठता है।
दिवाली को रोशनी का उत्सव या लड़ीयों की रोशनी के रुप में भी जाना जाता है जोकि घर में लक्ष्मी के आने का संकेत है साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये मनाया जाता है। असुरों के राजा रावण को मारकर प्रभु श्रीराम ने धरती को बुराई से बचाया था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अपने घर, दुकान, और कार्यालय आदि में साफ-सफाई रखने से उस स्थान पर लक्ष्मी का प्रवेश होता है। उस दिन घरों को दियों से सजाना और पटाखे फोड़ने का भी रिवाज है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई चीजों को खरीदने से घर में लक्ष्मी माता आती है। इस दिन सभी लोग खास तौर से बच्चे उपहार, पटाखे, मिठाईयां और नये कपड़े बाजार से खरीदते है। शाम के समय, सभी अपने घर में लक्ष्मी अराधना करने के बाद घरों को रोशनी से सजाते है। पूजा संपन्न होने पर सभी एक दूसरे को प्रसाद और उपहार बाँटते है साथ ही ईश्वर से जीवन में खुशियों की कामना करते है। अंत में पटाखों और विभिन्न खेलों से सभी दिवाली की मस्ती में डूब जाते है।

Sunday, 16 July 2017

Holi Essay

होली निबंध  (500 शब्द)


होली रंगों का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो हर साल फागुन के महीने में भारत के लोगों द्वारा बड़ी खुशी के साथ मनाया जाता है। ये ढ़ेर सारी मस्ती और खिलवाड़ का त्योहार है खास तौर से बच्चों के लिये जो होली के एक हफ्ते पहले और बाद तक रंगों की मस्ती में डूबे रहते है। हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा इसे पूरे भारतवर्ष में मार्च के महीने में मनाया जाता है खासतौर से उत्तर भारत में।
सालों से भारत में होली मनाने के पीछे कई सारी कहानीयाँ और पौराणिक कथाएं है। इस उत्सव का अपना महत्व है, हिन्दु मान्यतों के अनुसार होली का पर्व बहुत समय पहले प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जब होलिका अपने भाई के पुत्र को मारने के लिये आग में लेकर बैठी और खुद ही जल गई। उस समय एक राजा था हिरण्यकशयप जिसका पुत्र प्रह्लाद था और वो उसको मारना चाहता था क्योंकि वो उसकी पूजा के बजाय भगवान विष्णु की भक्ती करता था। इसी वजह से हिरण्यकशयप ने होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने को कहा जिसमें भक्त प्रह्लाद तो बच गये लेकिन होलिका मारी गई।
जबकि, उसकी ये योजना भी असफल हो गई, क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था इसलिये प्रभु ने उसकी रक्षा की। षड़यंत्र में होलिका की मृत्यु हुई और प्रह्लाद बच गया। उसी समय से हिन्दु धर्म के लोग इस त्योहार को मना रहे है। होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन होता है जिसमें लकड़ी, घास और गाय के गोबर से बने ढ़ेर में इंसान अपने आप की बुराई भी इस आग में जलाता है। होलिका दहन के दौरान सभी इसके चारों ओर घूमकर अपने अच्छे स्वास्थय और यश की कामना करते है साथ ही अपने सभी बुराई को इसमें भस्म करते है। इस पर्व में ऐसी मान्यता भी है कि सरसों से शरीर पर मसाज करने पर उसके सारे रोग और बुराई दूर हो जाती है साथ ही साल भर तक सेहत दुरुस्त रहती है।
होलिका दहन की अगली सुबह के बाद, लोग रंग-बिरंगी होली को एक साथ मनाने के लिये एक जगह इकठ्ठा हो जाते है। इसकी तैयारी इसके आने से एक हफ्ते पहले ही शुरु हो जाती है, फिर क्या बच्चे और क्या बड़े सभी बेसब्री से इसका इंतजार करते है और इसके लिये ढ़ेर सारी खरीदारी करते। यहाँ तक कि वो एक हफ्ते पहले से ही अपने दोस्तों, पड़ोसियों और प्रियजनों के साथ पिचकारी और रंग भरे गुब्बारों से खेलना शुरु कर देते। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग गुलाल लगाते साथ ही मजेदार पकवानों का आनंद लेते।

Holi essay


होली निबंध  (500 शब्द)


होली रंगों का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो हर साल फागुन के महीने में भारत के लोगों द्वारा बड़ी खुशी के साथ मनाया जाता है। ये ढ़ेर सारी मस्ती और खिलवाड़ का त्योहार है खास तौर से बच्चों के लिये जो होली के एक हफ्ते पहले और बाद तक रंगों की मस्ती में डूबे रहते है। हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा इसे पूरे भारतवर्ष में मार्च के महीने में मनाया जाता है खासतौर से उत्तर भारत में।
सालों से भारत में होली मनाने के पीछे कई सारी कहानीयाँ और पौराणिक कथाएं है। इस उत्सव का अपना महत्व है, हिन्दु मान्यतों के अनुसार होली का पर्व बहुत समय पहले प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जब होलिका अपने भाई के पुत्र को मारने के लिये आग में लेकर बैठी और खुद ही जल गई। उस समय एक राजा था हिरण्यकशयप जिसका पुत्र प्रह्लाद था और वो उसको मारना चाहता था क्योंकि वो उसकी पूजा के बजाय भगवान विष्णु की भक्ती करता था। इसी वजह से हिरण्यकशयप ने होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने को कहा जिसमें भक्त प्रह्लाद तो बच गये लेकिन होलिका मारी गई।
जबकि, उसकी ये योजना भी असफल हो गई, क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था इसलिये प्रभु ने उसकी रक्षा की। षड़यंत्र में होलिका की मृत्यु हुई और प्रह्लाद बच गया। उसी समय से हिन्दु धर्म के लोग इस त्योहार को मना रहे है। होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन होता है जिसमें लकड़ी, घास और गाय के गोबर से बने ढ़ेर में इंसान अपने आप की बुराई भी इस आग में जलाता है। होलिका दहन के दौरान सभी इसके चारों ओर घूमकर अपने अच्छे स्वास्थय और यश की कामना करते है साथ ही अपने सभी बुराई को इसमें भस्म करते है। इस पर्व में ऐसी मान्यता भी है कि सरसों से शरीर पर मसाज करने पर उसके सारे रोग और बुराई दूर हो जाती है साथ ही साल भर तक सेहत दुरुस्त रहती है।
होलिका दहन की अगली सुबह के बाद, लोग रंग-बिरंगी होली को एक साथ मनाने के लिये एक जगह इकठ्ठा हो जाते है। इसकी तैयारी इसके आने से एक हफ्ते पहले ही शुरु हो जाती है, फिर क्या बच्चे और क्या बड़े सभी बेसब्री से इसका इंतजार करते है और इसके लिये ढ़ेर सारी खरीदारी करते। यहाँ तक कि वो एक हफ्ते पहले से ही अपने दोस्तों, पड़ोसियों और प्रियजनों के साथ पिचकारी और रंग भरे गुब्बारों से खेलना शुरु कर देते। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग गुलाल लगाते साथ ही मजेदार पकवानों का आनंद लेते।

Zaid Impresses Baba Ramdev